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बिहार में अग्निवीर और पुलिस भर्ती के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, पूर्व सैनिक गिरफ्तार

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बिहार के मोतिहारी में अग्निवीर और पुलिस भर्ती के नाम पर युवाओं से ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। पुलिस ने पूर्व सैनिक शिवेंद्र भूषण कुमार को गिरफ्तार कर कई एडमिट कार्ड और दस्तावेज बरामद किए हैं।

मोतिहारी/आलम की खबर:बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे बेरोजगार युवाओं को ठगने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है। पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में पुलिस ने अग्निवीर और पुलिस भर्ती के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने के आरोप में एक पूर्व सैनिक को गिरफ्तार किया है। आरोपी युवाओं को सेना और बिहार पुलिस में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूल रहा था। पुलिस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान रघुनाथपुर थाना क्षेत्र निवासी शिवेंद्र भूषण कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार आरोपी पहले सेना में रह चुका है और इसी पहचान का फायदा उठाकर बेरोजगार युवाओं को अपने जाल में फंसाता था। पूछताछ के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की जांच अब और तेज कर दी गई है क्योंकि पुलिस को शक है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

जानकारी के अनुसार इन दिनों मुजफ्फरपुर के चक्कर मैदान में अग्निवीर भर्ती रैली चल रही है। इसी दौरान आर्मी इंटेलिजेंस और जिला सूचना इकाई को भर्ती प्रक्रिया में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी। बताया गया कि कुछ लोग युवाओं को पैसे लेकर नौकरी दिलाने का दावा कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस और खुफिया एजेंसियां सक्रिय हो गईं और जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान पुलिस को शिवेंद्र भूषण कुमार के बारे में अहम जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने उसके ठिकाने पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान जो दस्तावेज मिले, उन्हें देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। मौके से अग्निवीर भर्ती, बिहार पुलिस भर्ती और एसएससी परीक्षा से जुड़े कई एडमिट कार्ड बरामद किए गए। इसके अलावा दर्जनों युवाओं के मैट्रिक और इंटर के मूल प्रमाण पत्र भी पुलिस ने जब्त किए हैं।

पुलिस का कहना है कि आरोपी मोतिहारी में एक फिजिकल ट्रेनिंग एकेडमी चलाता था। यहां सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी कराने के नाम पर युवाओं को जोड़ा जाता था। ट्रेनिंग के दौरान युवाओं को यह भरोसा दिलाया जाता था कि उसकी पहुंच भर्ती बोर्ड तक है और पैसे के बदले चयन सुनिश्चित कराया जा सकता है। इसी झांसे में आकर कई बेरोजगार युवाओं ने आरोपी पर भरोसा कर लिया।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी प्रत्येक अभ्यर्थी से करीब तीन लाख रुपये तक लेने की तैयारी में था। कई युवाओं से उसने एडवांस के तौर पर पैसे भी वसूल लिए थे। पुलिस को शक है कि इस गिरोह के जरिए बड़ी संख्या में युवाओं को ठगने की योजना बनाई जा रही थी।

मामले का खुलासा तब हुआ जब रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के सोरपनिया पचपकड़ी गांव निवासी कमलेश कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। कमलेश ने बताया कि वह सिपाही भर्ती की तैयारी के लिए मोतिहारी के गांधी मैदान जाता था। वहीं उसकी मुलाकात शिवेंद्र भूषण कुमार से हुई। आरोपी ने खुद को प्रभावशाली व्यक्ति बताते हुए दावा किया कि उसकी सेना और पुलिस भर्ती बोर्ड में मजबूत पकड़ है।

शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपी ने कई युवाओं को भरोसे में लेकर कहा कि लिखित परीक्षा और फिजिकल टेस्ट की ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। पैसे देने पर “सेटिंग” के जरिए चयन सुनिश्चित कराया जाएगा। धीरे-धीरे आरोपी ने लगभग 100 युवाओं को अपने संपर्क में ले लिया और उनसे नौकरी के नाम पर रकम मांगनी शुरू कर दी।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि बिहार के कई जिलों में ऐसे गिरोह सक्रिय हैं जो बेरोजगार युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाते हैं। सेना, पुलिस और अन्य सरकारी नौकरियों में भर्ती दिलाने के नाम पर पहले युवाओं को ट्रेनिंग सेंटर से जोड़ा जाता है, फिर उन्हें अंदरूनी सेटिंग और पक्की नौकरी का सपना दिखाया जाता है। कई मामलों में युवाओं से लाखों रुपये वसूले जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों की सीमित संख्या के कारण बड़ी संख्या में युवा ऐसे झांसे में आ जाते हैं। कई अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करने के बाद भी चयन नहीं होने से मानसिक दबाव में रहते हैं, जिसका फायदा ऐसे गिरोह उठाते हैं। पुलिस अधिकारियों ने युवाओं से अपील की है कि किसी भी दलाल या बिचौलिए के झांसे में न आएं।

सेना और बिहार पुलिस की ओर से भी स्पष्ट किया गया है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होती है। चयन केवल लिखित परीक्षा, फिजिकल टेस्ट और मेरिट के आधार पर किया जाता है। किसी भी व्यक्ति द्वारा पैसे लेकर नौकरी दिलाने का दावा करना पूरी तरह फर्जी है। अधिकारियों ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे मांगता है तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को देनी चाहिए।

फिलहाल पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन, दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच कर रही है। साथ ही उसके संपर्क में रहे अन्य लोगों की पहचान भी की जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि इस मामले में और भी लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।

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